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लोगो की तरह राह भटक कर नहीं मिलता

Satish Borkar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लोगो की तरह राह भटक कर नहीं मिलता ।
        
                                                    
                            
यह सत्य कभी झूठ के दर पर नहीं मिलता ।

अब नाम तुम्हारा लिखूँ तो किस पे लिखूँ मैं,
संसार में तो कुछ भी अनश्वर नहीं मिलता ।

सूरज यहीं कहता है हमें आँखें दिखा के,
कहते हो अँधेरा है मुझें पर नहीं मिलता ।

कोई है सिकन्दर यहाँ कोई है कलन्दर,
इक सा सभी लोगो को मुकद्दर नहीं मिलता ।

दुःख दर्द कपट लोभ जलन क्रोध असंतोष,
इंसान के अंदर है ये बाहर नहीं मिलता ।

दिन रात जहाँ इश्क की होती थी गुटरगूँ,
उन शाखों पे अब श्वेत कबूतर नहीं मिलता ।

मंजिल का पता वादियाँ देती है सफर में,
पगडंडियों में मील का पत्थर नहीं मिलता ।
-सतीश बोरकर
2 महीने पहले
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