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जो होगा उसको सह कर देखते है

Satish Borkar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो होगा उसको सह कर देखते है ।
        
                                                    
                            
चलो सच्चाई कह कर देखते है ।

तरफदारी निगाहों ने की है सो,
किसी के दिल में रह कर देखते है ।

हवा से मात खाई है अभी तक,
हवा के संग बह कर देखते है ।

किसी की आस में अब धीरे धीरे,
किसी खण्डर सा ढह कर देखते है ।

नजर से उसकी अब तक दूर थे सो,
नज़र में उस की रह कर देखते है ।

निगाहों का कहा वो सुन न पाए,
लबों से बात कह कर देखते है ।
- सतीश बोरकर
एक महीने पहले
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