जो होगा उसको सह कर देखते है ।
चलो सच्चाई कह कर देखते है ।
तरफदारी निगाहों ने की है सो,
किसी के दिल में रह कर देखते है ।
हवा से मात खाई है अभी तक,
हवा के संग बह कर देखते है ।
किसी की आस में अब धीरे धीरे,
किसी खण्डर सा ढह कर देखते है ।
नजर से उसकी अब तक दूर थे सो,
नज़र में उस की रह कर देखते है ।
निगाहों का कहा वो सुन न पाए,
लबों से बात कह कर देखते है ।
- सतीश बोरकर
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