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बदन टूटने तक कमाता रहूँगा

Satish Borkar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बदन टूटने तक कमाता रहूँगा
        
                                                    
                            
किसी के लिए घर सजाता रहूँगा

वो इल्जाम देते है देते रहेंगे,
मैं चुपचाप रिश्ता निभाता रहूँगा।

भुलाने न दूँगा तवारीख़ अपनी
कहानी पुरानी सुनाता रहूँगा

सदाक़त की तारीफ़ में दुनिया वालों,
लबों से सदाएँ उठाता रहूँगा।

तपिश में मिलेगा किसी को तो आराम
मैं बारिश में पौधे लगाता रहूँगा।

किसी के भी हिस्से न आए मेरा ग़म,
सफर में सदा मुस्कुराता रहूँगा।
- सतीश बोरकर
2 महीने पहले
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