बदन टूटने तक कमाता रहूँगा
किसी के लिए घर सजाता रहूँगा
वो इल्जाम देते है देते रहेंगे,
मैं चुपचाप रिश्ता निभाता रहूँगा।
भुलाने न दूँगा तवारीख़ अपनी
कहानी पुरानी सुनाता रहूँगा
सदाक़त की तारीफ़ में दुनिया वालों,
लबों से सदाएँ उठाता रहूँगा।
तपिश में मिलेगा किसी को तो आराम
मैं बारिश में पौधे लगाता रहूँगा।
किसी के भी हिस्से न आए मेरा ग़म,
सफर में सदा मुस्कुराता रहूँगा।
- सतीश बोरकर
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