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सब गुल गुलशन गतिमान रहे

संतराम शर्मा 'हिन्दी'

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने मन की स्नेह सरिता से
        
                                                    
                            
सरस श्रृंखला बुनता हूं,
कर्म, धैर्य, संयम,शील से
सृजन के सुमन चुनता हूं।

निर्माण नित्य धर्म मेरा,
पथ परिभाषा ही श्रम मेरा।
नौनिहाल सदा निर्बाध बढ़े,
बस ये ही सपने बुनता हूं।

मेरा गौरव मेरे शिष्य हैं,
भारत का उज्ज्वल भविष्य हैं।
ऊर्जा उत्कंठा का उत्थान रहे,
अहर्निष यही बस भान रहे।

सब गुल गुलशन गतिमान रहे,
अन्तर्मन में यही ध्यान रहे।
मैं शिक्षक हूं, शिक्षा को सम्बल दूं,
बस यही मेरी पहचान रहे।
--संतराम शर्मा 'हिन्दी'
एक महीने पहले
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