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अकेले रहना सीख गया मैं

Sarvesh Sapre

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समुंदर किनारे पड़े पत्थर जैसा बन गया हूँ मैं,
        
                                                    
                            
अकेले रहना कहाँ से सीख गया हूँ मैं।

दोस्ती की कश्ती में बैठा था मैं,
किनारा देखकर खुश हो गया था मैं।
तैरना आता था मुझे,
पर पता नहीं कैसे डूब गया मैं।

फ़रिश्तों की तलाश में था मैं,
समझना सीख गया मैं,
उड़ना सीख गया मैं,
अकेले रहना सीख गया मैं।
2 महीने पहले
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