वसंत ऋतु की खिली भोर है,
फूलों की मुस्कान चारों ओर है।
चेहरों पर बिखरी सच्ची मुस्कान है,
खुशियों से भरा आज हर इंसान है।
बहती है वो ठंडी-ठंडी पावन हवा,
जो बनती है हर एक दिल की दवा।
छूकर तन-मन को देती जो सुकून,
जगाती है जीने का नया एक जुनून।
लगता है मिट गया शरीर का हर दर्द,
दूर हो गया जीवन का मौसम सर्द।
कुछ पल के लिए थमी हर पीड़ा है,
प्रकृति ने सुंदर रूप आज ओढ़ा है।
पात-पात पर बिखरा नया रंग है,
हवाओं में बहती एक नई उमंग है।
भूलकर शिकवे सब गले मिल रहे,
बागों में सुंदर गुलाब खिल रहे।
कोयल की कूक में मीठी सी तान है,
लगता धरा पर उतरा आसमान है।
इस पावन बेला में खो जाएँ हम,
मिट जाए जीवन का हर एक गम।
-: सार्थक पियुष सिंह