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आईना समाज का

Sarthak Piyush

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भीड़ बहुत है दुनिया में,
        
                                                    
                            
पर दिलों में खालीपन है,
चेहरों पर मुस्कान सजी है,
आँखों में फिर भी दर्द छिपा है।

हम कहते हैं- सब बदल गया,
पर सोच बही पुरानी है,
बेटी आज भी डरकर निकले,
तो कैसी यह आजादी है?

जो पड़ोस की लड़की अपने प्रेम के साथ चली जाए,
तो उसे चरित्रहीन, बिगड़ी हुई,
और न जाने क्या-क्या कह देते हैं,
पर बेटे की वही गलती हो जाए,
तो उसे समझदार कह देते हैं।

गरीब की मेहनत सस्ती है,
अमीर की आवाज बड़ी,
इंसाफ की राहें लंबी हैं,
और दौलत की राहें खड़ी।

हम दूसरों की गलतियाँ गिनते,
अपना सच भूल जाते हैं,
किसी के आँसू देखकर भी
बस तस्वीरें खींचकर चले जाते हैं।

कभी किसी भूखे को रोटी देना,
कभी किसी टूटे को थाम लेना,
किसी मजबूर की आवाज बनना,
यही तो इंसान होना है।

समाज तभी बदलेगा सच में,
जब बदलाव हमसे आएगा,
उँगली उठाने से पहले
अपना आईना दिखाएगा।

-: सार्थक पियुष सिंह
4 घंटे पहले
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