आई है ऋतु प्यारी, दुर्गा पूजा की है तैयारी ;
घर-घर में जलते हैं दीये, गूंजती है भक्ति न्यारी।
शेर पर सवार होकर आईं माँ भवानी ;
सब भक्तों को सुनाती हैं वो प्रेम की कहानी।
पंडाल सजे हैं सुंदर और रंग-बिरंगे सारे ;
जगमगा रहे हैं आसमान में चाँद और सितारे।
ढोल और ढाक की थाप गूंजे चारों ओर ;
नाच उठे मन सबका जैसे नाचे कोई मोर।
महिषासुर का वध किया माँ दुर्गा ने जब ;
सभी पापों का सर्वनाश हुआ धरती पर तब।
अष्टमी और नवमी पर होती है विशेष पूजा ;
दुर्गा माँ की महिमा से बड़ा नहीं है कोई दूजा।
नौ कन्याओं को पूजकर भोग लगाते हैं ;
सब मिलकर माँ दुर्गा का गुणगान गाते हैं।
बुराई पर अच्छाई की होती है हमेशा जीत ;
गूंजती रहे सदा अम्बे माँ की ये प्यारी गीत।
दसवें दिन होता है माँ दुर्गाजी का विसर्जन ;
सब नम आँखों से करते हैं श्रद्धा-सुमन अर्पण।
खुशियाँ मनाओ सब मिलकर आज के दिन ;
कोई भी न रहे उदास माँ दुर्गा के पूजन बिन।