रंगमंच की कठपुतलियां
आंखों में काजल
होठों पे लिपस्टिक
हाथ भरकर चूड़ियां थी
दुनिया का मेला था और
तीन जवान लड़कियां थी |
मैं भी वही था , मगर अकेला
मेरे लिए तीनों हसीन थी
ना कम , ना ज्यादा...मगर
पहली लड़की ने मुझे ठुकरा दिया, क्योकि
मेरी जाति उससे छोटी थी
दूसरी लड़की ने मना किया , क्योकि
हमारा धरम जुदा था
लेकिन तीसरी लड़की जो
मेरी ही जाति और धरम की थी
उसने भी मुझे मना कर दिया क्योंकि
उसे गोरा लड़का चाहिए था |
एक लड़की और थी
जो सबसे ज्यादा खूबसूरत थी मगर
उसकी जाति मेरे से छोटी थी
दलित थी , अछूत थी और
वो मुझसे शादी के लिए राजी हो गयी |
मैं खुशी के मारे झूम रहा था
हसीन ख्वाब बुन रहा था , और
उन सबकी नजरों को निहार रहा था
जो भोर तक रंगमंच पर टिकी रही......
किसी को सुई , किसी को धागा तो
किसी को गुड़िया पसंद थी
ताज्जुब की बात है....
एक लड़की को छोड़कर
तीनों को कठपुतलियां पसंद थी |
" संतोष यदुवंशी "
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