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शब्दों के बाण

sanserpal singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शब्दों के बाण जहां चलते हैं
        
                                                    
                            
लोग वहां मुश्किल से संभलते हैं
अक्षर ही शब्द की जान है
जहां हटे शब्दों के अर्थ बदलते हैं
अंधे का अंधा द्रौपदी ने कह तो दिया
सबने देखा कैसे परिणाम निकलते हैं
जब भी बोलो सोच समझ कर बोलो
वरना चाकू छुरे चलते हैं
इतिहास गवाह है
ये रामायण को भी
महाभारत में बदलते हैं
शब्दों के बाण जहां चलते हैं
लोग वहां मुश्किल से संभलते हैं
मुँह रूपी तरकश से
इन्हें ध्यान से निकालो
वरना शब्दों के बाण की रफ्तार
इतनी तेज होती है
ये निकलते ही लगते हैं
शब्दों के बाण जहां चलते हैं
लोग वहां मुश्किल से संभलते हैं

by Sanser Pal Singh


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