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प्रेम पत्र

Sankhajit Bhattacharjee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वह मेरे साथ स्कूल में पढ़ती थी।
        
                                                    
                            
उसके मन की बात मैं लिखकर
मेरे दोस्त को देता था।
वह मुझे बोलती थी लिखने के लिए -
वह भी अच्छी दोस्त थी।
अफ़सोस की बात यह है कि
मैं मेरे मन की बात लिखकर
उस लड़की को दे नहीं सका।
दोनों की शादी हो गई।
दोनों सुखी हैं।
मेरे साथ कोई संबंध नहीं है।
लिखित चिट्ठियाँ मेरे मन के अंदर
अलिखित होकर बैठ गई।
मैं उन्हें आँखें बंद करके देख सकता हूं,
लेकिन आँखें बंद करके या खोलकर पढ़ नहीं सकता।
3 घंटे पहले
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