आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

प्रेम पत्र

                
                                                         
                            वह मेरे साथ स्कूल में पढ़ती थी।
                                                                 
                            
उसके मन की बात मैं लिखकर
मेरे दोस्त को देता था।
वह मुझे बोलती थी लिखने के लिए -
वह भी अच्छी दोस्त थी।
अफ़सोस की बात यह है कि
मैं मेरे मन की बात लिखकर
उस लड़की को दे नहीं सका।
दोनों की शादी हो गई।
दोनों सुखी हैं।
मेरे साथ कोई संबंध नहीं है।
लिखित चिट्ठियाँ मेरे मन के अंदर
अलिखित होकर बैठ गई।
मैं उन्हें आँखें बंद करके देख सकता हूं,
लेकिन आँखें बंद करके या खोलकर पढ़ नहीं सकता।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
44 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर