जिंदगी में मेरी मेरे दोस्त कुछ खास हैं
बड़े हैं अजीज हर हाल मेरे साथ हैं
दिखते हैं सीधे- सादे, सारे खूंखार हैं
परेशानी आये कोई ये ही हथियार हैं
लिखते और बोलते हो, ये जो सारे शब्द हैं
सारे मेरे दोस्त हैं ये मुझसे आबद्ध हैं
ऐसे में जो मेरा कोई बिगाड़े तारतम्य
हो जायें एक आवाज पर अरेंज सारे क्रम में
फिर इनमें जो मचती है होड़ आप देखिये
दूर बैठे स्वत: जोड़ तोड़ आप देखिये
ये सोचें लो टंटा मिटा दें रोज रोज का
उठा लें बंदूकें ये रूप धरें फौज का