विज्ञापन

अगर चाहते हो समाज में तुम्हारी वाह-वाह हो

Sanjeev Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कायाकल्प
        
                                                    
                            

अपनें भले बुरे से यदि आगाह हो
आनें वाले कल की तुम्हें परवाह हो
जिंदगी में अगर कुछ बननें की चाह हो
अगर चाहते हो समाज में तुम्हारी वाह-वाह हो

एक एक स्टेप रोज चढ़ना पड़ेगा
जिद करनीं पड़ेगी, अडना पड़ेगा
अपनीं ही कमियों से रोज लडना पड़ेगा
कोई शॉर्टकट नहीं होता, पढ़ना पड़ेगा

पढ़ना मुश्किल लगता हो, मन ना करता हो
या समझ न आता हो, सिर के ऊपर से उतरता हो
पढ़ना तो फिर भी पड़ेगा, मतलब जूझना पड़ेगा
पार पानें का तरीका ढूँढना पड़ेगा, बूझना पड़ेगा

काम दुनिया में कोई आसान नहीं होता
जो आसानी से हो जाये वो काम नहीं होता
कोई इज्जत नहीं करता, बड़ा दाम नहीं होता
आसान काम करनें वालों का कहीं नाम नहीं होता

बड़ी उपलब्धि चाहिए तो बड़ा संकल्प लो
संकल्प ले लिया, तो फिर कोई ना विकल्प हो
धीरज ऐसा बेजोड़, अकल्प हो
बिखर के फिर से बन सको, ऐसा कायाकल्प हो
 
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile