विज्ञापन

भर जाता हूं

Sanjay Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अक्सर खाली बैठा बैठा
        
                                                    
                            
भर जाता हूं

बे तरतीब खयालों से
बहके हुए सवालों से

बचपन की याद से
निकम्मे समाजवाद से

फिलस्तीन में मची तबाही से
नकली भीड़ की वाह वाही से

कर्मचारियों की शिकायतों से
बेकार हो गई आदतों से

भर जाता हूं

भर जाता हूं

भर जाता हूं

रोज दिखने वाले चेहरों से
हत्या बलात्कार की खबरों से

देश में मची बैचेनी से
दम तोड़ती उम्मीदों से

कहानियों से कविताओं से
मोटिवेशन की विधाओं से

भर जाता हूं ।

खाली लोग जो कुछ नहीं करते
अपना माथा कहीं नहीं रगड़ते

खुशी से दो रोटी खाते हैं
रील देख कर मस्त सो जाते हैं

मनोवैज्ञानिक बताते हैं
ऐसे लोग लंबी जिंदगी बिताते हैं

भरे हुए लोग
भरते जाते हैं
भरते जाते हैं
और फिर एक दिन
खाली मौत मर जाते हैं ।
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all