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कम्बखत वो हमसे खिलवाड़ कर बैठे है।

Sanjay Pathak

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम यहाँ दिल हार कर बैठे हैं, और वो खैरियत तक नहीं पूछता
        
                                                    
                            
हम हर लम्हा जिसकी राह तकते हैं, वो अपने जहन में भी मुझे नहीं रखता
यही तो किस्मत-ए-ज़िल्लत है अपनी
कि जिस से हम बेइंतहा प्यार कर बैठे हैं,
कम्बखत वो हमसे खिलवाड़ कर बैठे है।
-संजय पाठक
9 घंटे पहले
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