मंथर गति से नाव चली,
अपनी यमुना के उस पार
चले झूमते मस्ती से हम
हाथ में अपने है पतवार
इन नदियों से ही होता था
पहले जग में सभी व्यापार
पथिक नावपर चढ़कर ही तो
करते थे नदियों को पार