वर्षा रानी - वर्षा रानी
लगती है तूँ बड़ी सुहानी ।
जब भी तूँ आ जाती है
सबके मन को बहलाती है
देखकर तेरा सुखद आगमन
सभी खुशी से गाते हैं
मेंढक राजा तो गला फाड़कर
सारे दिन टर्राते हैं।
है तेरी अजब कहानी
वर्षा रानी - वर्षा रानी ।
गाँव-गाँव और नगर-नगर के
गली-गली और डगर-डगर के,
सारे कचड़े धुल जाते हैं
किसानों में दिखने लगता है
एक नया उल्लास
मोर मगन हो भांगड़ा करता
और मोरनी लास ।
तेरा शीतल पानी
वर्षा रानी-वर्षा रानी ।
सूख चले तालाबों को मानो
फिर से जीवन मिल जाता है
सूख चले कानन का चेहरा
खुशियों से खिल जाता है ।
इसी तरह से सज–धज कर
आती रहना हर साल
आकर के हम बच्चों से
कहती जाना अपना हाल।
आना, ना करना आना-कानी
वर्षा रानी - वर्षा रानी ।
आती है तूँ संग लिए जब
शीतल-शीतल मंद पवन
झूमने लगते हैं मस्ती से,तब–
जहाँ-तहाँ पौधे व तरु गण
कितनी प्यारी लगती है तूँ
कितना प्यारा तेरा ये तन
तेरी ही छटा में खो जाता है
पागल-मतवाला ये मेरा मन।
सबकी जीवन दाता है तूँ
कहती है यह मेरी नानी ।
वर्षा रानी - वर्षा रानी
लगती है तूँ बड़ी सुहानी ।।