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खुशियों की एक नई रश्मि, आई अपने घर में ।

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रहते हम आपस में मिलकर, स्थिति चाहे जैसी हो।
        
                                                    
                            
खुशियां हर पल मिलकर बाटें, आई विपदा कैसी हो।
मिले खुशी दुर्लभ जीवन में, हंसकर जीना सीखा है।
हम अबोध बच्चे हैं तो क्या, पर कभी ना डरना सीखा है।

मिलकर रहना आपस में, हम सिखलाते सबको।
इन्हीं गुणों के कारण मित्रों! करते स्नेह सभी हमको।
पापा कहते मिले खुशी, ऐसा ही हर घर में।
खुशियों की एक नई रश्मि, आई अपने घर में ।
एक घंटा पहले
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