मां ममता की खान है,
मां स्नेह की मूर्ति।
मां ही है वह शब्द जिसे,
सुन आ जाती है नई स्फूर्ति।
हे मां तू धन्य है,
धन्य-धन्य तेरा बलिदान।
मां की चरणों में ही मिलते हैं,
ईश्वर अल्लाह राम।।
– संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’