विज्ञापन

ममता की खान

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मां ममता की खान है,
        
                                                    
                            
मां स्नेह की मूर्ति।
मां ही है वह शब्द जिसे,
सुन आ जाती है नई स्फूर्ति।

हे मां तू धन्य है,
धन्य-धन्य तेरा बलिदान।
मां की चरणों में ही मिलते हैं,
ईश्वर अल्लाह राम।।

– संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Shivam Awasthi

3 कविताएं

View Profile