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ममता की खान

                
                                                         
                            मां ममता की खान है,
                                                                 
                            
मां स्नेह की मूर्ति।
मां ही है वह शब्द जिसे,
सुन आ जाती है नई स्फूर्ति।

हे मां तू धन्य है,
धन्य-धन्य तेरा बलिदान।
मां की चरणों में ही मिलते हैं,
ईश्वर अल्लाह राम।।

– संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
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44 मिनट पहले

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