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मदमस्त फगुनवां आ गईले

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आओ रे सखियां उड़ायें गुलाल,
        
                                                    
                            
मदमस्त फगुनवां आ गइलें।
होली खेलें और मचायें धमाल,
निगोड़ी बदन अंगड़ा गइलें।।

जौ - सरसो - गेहूँ गदरा गइलें,
अमवा की डार बौरा गईलें।
फगुनहटी बयार देह दुखा गइलें,
मन में कसक एक जगा गइलें।।

अब मन में रहे ना कोई मलाल।
मदमस्त फगुनवां आ गइलें।।
–संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
3 घंटे पहले
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