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मदमस्त फगुनवां आ गईले

                
                                                         
                            आओ रे सखियां उड़ायें गुलाल,
                                                                 
                            
मदमस्त फगुनवां आ गइलें।
होली खेलें और मचायें धमाल,
निगोड़ी बदन अंगड़ा गइलें।।

जौ - सरसो - गेहूँ गदरा गइलें,
अमवा की डार बौरा गईलें।
फगुनहटी बयार देह दुखा गइलें,
मन में कसक एक जगा गइलें।।

अब मन में रहे ना कोई मलाल।
मदमस्त फगुनवां आ गइलें।।
–संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
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56 मिनट पहले

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