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उड़कर जाता इनके पास

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जगमग-जगमग करते तारे,
        
                                                    
                            
लगते कितने प्यारे-प्यारे
जी करता मैं इन्हें पकड़ लूँ,
अपनी मुट्ठी में इन्हें जकड़ लूँ
झिलमिल करते सारे तारे
लगते कितने न्यारे-न्यारे ।
आसमान में टिम-टिम करते
बच्चों के मन को हैं हरते
बिलकुल अंधेरे में रहते
ना जाने क्या-क्या है कहते।
नहीं किसी से कभी ये डरते
जगमग-जगमग करते तारे।

आसमान की शोभा हैं ये
नीले वितान की आभा हैं ये
दूर बहुत हमसे ये तारे
कैसे मिलजुल रहते सारे
गिनना इनको मुश्किल लगता
पाने का जी इनको करता।
इनमें से कुछ चमकीले हैं
और बहुत से भड़कीले हैं
जगमग-जगमग क्यों करते
बिना हिले ये क्यों न रहते ?

हैं ये सारे, कितने प्यारे
लगते कितने न्यारे-न्यारे
क्यों ईश्वर ने इन्हें बनाया?
शायद है दीपावली मनाया।
तभी तो ये जगमग करते हैं
दूर अंधेरा सब करते हैं।
भगवान अजब है तेरी लीला
कोई लाल कोई नीला, पीला
अधिक चटख है कोई-कोई
कुछ लगती हैं खोई-खोई ।

पंख अगर मेरे होते तो
उड़कर जाता इनके पास
इनको अपना मित्र बनाता
फिर लाता मैं इनको साथ
रहते मेरे घर में ये सब
घर मेरा जगमग करता
आ जाओ न तारे तुम सब
बुला-बुला कर हम हारे
कितने अच्छे तुम हो लगते
जगमग-जगमग करते सारे।
झिलमिल-झिलमिल करते तारे,
लगते सारे जग से न्यारे ।
एक घंटा पहले
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