मस्त हवायें ठण्डी-ठण्डी सबके देेह कंपाएं ।
दादा-दादी को देखो, कैसे दाँत कटकटाएं
साल रजाई स्वेटर निकले, जलने लगे अलाव
खिड़की मोंके जंगले बंद, ठण्डक का प्रभाव
कौन बताए,किसको,कितना, कैसे, कब सताया
जाड़ा आया, जाड़ा आया।
बचकर रहना जाड़े से,सुबह, शाम और रात
नहीं कोताही कोई करना, मानो मेरी बात
बैठ रजाई में पढ़ने का देखो मौसम आया ।
जाड़ा आया जाड़ा आया।।