हे मइया! मोहे खेलन दे अब
गोद में बैठा हूं कब से
बाजन दे अब मधुर बांसुरिया
मचल रहा है जी तब से
ग्वाल-बाल, गोपी सब रूठे
नहीं दिखी राधा कब से
बोली मइया–“ तूँ नटखट है,
करे शरारत बैठा जब से ”