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करे शरारत बैठा जब से

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हे मइया! मोहे खेलन दे अब
        
                                                    
                            
गोद में बैठा हूं कब से
बाजन दे अब मधुर बांसुरिया
मचल रहा है जी तब से
ग्वाल-बाल, गोपी सब रूठे
नहीं दिखी राधा कब से
बोली मइया–“ तूँ नटखट है,
करे शरारत बैठा जब से ”
एक घंटा पहले
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Suresh Kumar

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