दूध, दही, घी हमको देती,
मात्र रूपिणी यह गइया।
करें दुलार नवजात शिशु को,
चूम-चाट करके मइया।
गौ माता की सेवा करना,
जीवन सदा फलेगा भइया।
गायों की सेवा को तत्पर
रहते थे दिन-रात कन्हैया।
– संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’