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गायों की सेवा

                
                                                         
                            दूध, दही, घी हमको देती,
                                                                 
                            
मात्र रूपिणी यह गइया।
करें दुलार नवजात शिशु को,
चूम-चाट करके मइया।

गौ माता की सेवा करना,
जीवन सदा फलेगा भइया।
गायों की सेवा को तत्पर
रहते थे दिन-रात कन्हैया।

– संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
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54 मिनट पहले

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