विज्ञापन

देश हमारा अपना है

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जहां से न्यारा सबसे प्यारा,
        
                                                    
                            
देश हमारा अपना है ।
कभी झुके ना इसका सर,
यही हमारा सपना है।

कल-कल करती यहाँ की नदियाँ,
झर-झर झरते झरना हैं।
काम कोकिलों का कूँ-कूँ से,
सबके मन को हरना है ।।

हिमगिरि के उत्तुंग शिखर सा,
उच्च मनोबल अपना है।
इसकी रक्षा में नित हमको,
भुवन-भाष्कर सा तपना है।।

हिंदू ,मुस्लिम, सिख, इसाई
सबको बांधे रखना है ।
एकता, अखंडता हेतु हिंद के,
जन-जन को साधे रखना है।।

निम्न सोच वाले लोगों का
काम, हमें भड़काना है ।
फूट डालकर हम अपनों में,
अपना पाँव जमाना है।।

हीन भावना वालों सुन लो!
हम सब ने मिल ठाना है ।
भाई-चारा व प्रेम भावना,
आपस में हमें बढ़ाना है ।।

हर दुष्ट, हर जालिम को अब,
पाँव तले कुचल देंगे ।
देशद्रोहियों संभलो वरना,
मसक समान मसल देंगे।।

पढ़-लिख कर विद्वान बने हम,
देश का मान बचाना है।
काँपे थर-थर दुश्मन जिससे,
ऐसा स्वांग रचाना है।

जय हिंद, जय भारत माता,
निशि-दिन हमको जपना है।
जहाँ से न्यारा, सबसे प्यारा
देश हमारा अपना है।।

 
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manoj Kumar

428 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

451 कविताएं

View Profile