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देश हमारा अपना है

                
                                                         
                            जहां से न्यारा सबसे प्यारा,
                                                                 
                            
देश हमारा अपना है ।
कभी झुके ना इसका सर,
यही हमारा सपना है।

कल-कल करती यहाँ की नदियाँ,
झर-झर झरते झरना हैं।
काम कोकिलों का कूँ-कूँ से,
सबके मन को हरना है ।।

हिमगिरि के उत्तुंग शिखर सा,
उच्च मनोबल अपना है।
इसकी रक्षा में नित हमको,
भुवन-भाष्कर सा तपना है।।

हिंदू ,मुस्लिम, सिख, इसाई
सबको बांधे रखना है ।
एकता, अखंडता हेतु हिंद के,
जन-जन को साधे रखना है।।

निम्न सोच वाले लोगों का
काम, हमें भड़काना है ।
फूट डालकर हम अपनों में,
अपना पाँव जमाना है।।

हीन भावना वालों सुन लो!
हम सब ने मिल ठाना है ।
भाई-चारा व प्रेम भावना,
आपस में हमें बढ़ाना है ।।

हर दुष्ट, हर जालिम को अब,
पाँव तले कुचल देंगे ।
देशद्रोहियों संभलो वरना,
मसक समान मसल देंगे।।

पढ़-लिख कर विद्वान बने हम,
देश का मान बचाना है।
काँपे थर-थर दुश्मन जिससे,
ऐसा स्वांग रचाना है।

जय हिंद, जय भारत माता,
निशि-दिन हमको जपना है।
जहाँ से न्यारा, सबसे प्यारा
देश हमारा अपना है।।

 
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एक घंटा पहले

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