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बुद्धि का दान

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हे ईश्वर ! तुम परम महान ।
        
                                                    
                            
दे दो हमको बुद्धि का दान
हम बच्चे हैं अभी नादान
पढ़-लिख कर हम बने महान।

करूँ प्रार्थना मैं भगवान !
बना दो तुम मुझको इंसान
दो मुझको ऐसा वरदान
फैलूं मैं जितना आसमान ।
हे ईश्वर तुम परम महान ।
दे दो हमको बुद्धि का दान ।।

मेरी प्रार्थना करो स्वीकार
दे दो तुम हमको दीदार
हमपर करना इतना उपकार
सदा लुटाना अपना प्यार।
कोमल मन के हम हैं बच्चे
हम अबोध मन के हैं सच्चे
हम सबको तुम लगते अच्छे
अभी उमर के हम हैं कच्चे ।।

हमीं राष्ट्र के निर्माता हैं
हमीं देश की शान
देश के लिए तन –मन हाजिर
हाजिर है अपनी जान।
हे ईश्वर तुम परम महान
दे दो हमको बुद्धि का दान।।
ध्यान धरें हम सब नित तेरी सुन लो अरजी ईश्वर मेरी
कृपा दृष्टि बरसाते रहना
मन मेरा हर्षाते रहना ।

कभी तुम्हें हम भूल ना पाएँ,
सुबह-शाम तेरे गुण गाएँ
तुम्ही अनाथों के हो नाथ
रहते सदा भक्तों के साथ ।
बच्चे तुमको बहुत हैं भाते सुबह-शाम हैं शीश झुकाते
हाथ जोड़कर ध्यान लगाते
मीठे सपनों में खो जाते ।

हम सब तेरे ऋणी बहुत हैं
हमें बनाया जो इंसान
देखो हमसे रुष्ट ना होना
बच्चे होते हैं शैतान ।
हे ईश्वर तुम परम महान ।
दे दो हमको बुद्धि का दान।।

तुम्ही हमारे पिता हो ईश्वर
तुम्ही हमारी हो माता
तुम्हीं हमारे सखी-सहेली
तुम्हीं हमारे हो भ्राता ।
दर्शन दे दो हमको एक बार
धन्य-धन्य हो जायेंगे हम
पड़ जाये जो सिर पे हाथ
भव सागर तर जायेंगे हम ।

हम बच्चों के सपने में आना ईश्वर तूँ ना हमें भुलाना
कहीं जरूरत पड़े हमारी, तो
हमको फौरन फोन लगाना ।
आयेंगे हम सभी झपटकर
चाहे रखना डांट–डपट कर
रो लेंगे हम तुम्हें लिपटकर
सो जाना प्रभु! हमें चिपटकर ।

मिलेगा हमको कितना आनंद
जब देखेंगे तुमको पास
पाएंगे दर्शन जरूर हम
सभी लगाए बैठे आस ।
हमें बता दो कब आना है
खोल के बैठे है हम कान ।
हे ईश्वर तुम परम महान !
दे दो हमको बुद्धि का दान।।
2 घंटे पहले
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