मुझे बंदूक दिला दे रे,
ओ भैया हमारे !
सीमा पे जा करके मेरे भाई,
मैं करूंगा रखवारी ।
घुस आने ना पाए कोई,
देखो पापी, अत्याचारी ।
तुझे मैं… तुझे मैं…
तुझे मैं सुरक्षित बना दूं रे,
ओ भैया हमारे !
मुझे बंदूक दिला दे रे,
ओ भैया हमारे !
देखो मारे कितने लोग,
कैसा बढ़ा नफरत का रोग,
अब इनको सबक सिखाऊंगा,
जीते त्रिलोक दिखाऊंगा,
तुझे मैं… तुझे…मैं
तुझे चैन की नींद सुलाऊँ रे,
ओ भैया हमारे !
मुझे बंदूक दिला दे रे,
ओ भैया हमारे !
प्रतिदिन करते खून खराबा,
कितने मरते चाचा–बाबा,
अब इनको खूब लताडूंगा,
दौड़ा कर घर में मरूँगा ।
तुझे मैं… तुझे मैं …
तुझे निष्कंटक राज दिला दूं रे,
ओ भैया हमारे !
मुझे बंदूक दिला दे रे,
ओ भैया हमारे ।।