आओ खेलें हम सब मिलकर, मौसम बना सुहावन है
हम भी बच्चे, तुम भी बच्चे, अपना हृदय पावन है
सदियों से इस देश के बच्चे, होते रहे लुभावन हैं
अपने प्यारे देश की मिट्टी, देखो कितना मनभावन है।
कितना निश्छल जीवन अपना, मिलकर आओ खेलें हम सब
हर लें सारे जन की पीड़ा, हों उदास ये मानव जब–जब
दृश्य सुहावन कितना अपना, आओ बात करें सानन्द
जिसे देख जग वाले सीखें, मिलकर रहने में आनन्द।।