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नारी का स्थान और बदलता परिदृश्य

sangam maurya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देख आज मणिपुर की घटना आंख मेरी भर आई है,
        
                                                    
                            
शर्मसार हो मानवता भी देती आज दुहाई है ।
सुनो कापुरुष यूं ही तुमने नारी गौरव हरण किया,
तेरी संतति बढ़े धरा पर उसने तुमको वरण किया ।
इक नारी मां बनकर तुमको इस धरती पर लाई है,
इक नारी ही बिन भाई की सूनी पड़ी कलाई है ।
इक नारी जीवन में आए घर आंगन महका जाए,
मां, बहनों से आगे बढ़ जीवन भर साथ निभा जाए ।
इक नारी गोदी में खेले देती है उल्लास नया,
कभी अगर गम हो जीवन में वो देती है हास नया ।
कभी डांटती, कभी झगड़ती,कभी वो उलझन हरती है,
कदम कदम पर संबल बनकर अदभुत साहस भरती है ।
कैसे भूल गए नारी से बार बार अभिनंदन को,
चरण वंदना मां की वो, बहनों के रक्षा बंधन को ।
बहना बेटी दिखी न तुमको क्या तुम हो इंसान नही,
मातृ शक्ति को हाथ लगाया क्या ये तुमको भान नहीं ।
कायर पुरुष लूटते हैं गर इज्जत उसकी बेटी की,
चाह रही भारत मां फिर से बेटी फूलन देवी सी ।
कोई अगर किसी नारी पर ऐसा अत्याचार करे,
क्यों ना वो हथियार उठाए दुष्टों का संहार करे ।
रणचण्डी बन जाएं नारी दुष्ट आत्मा कांप उठे,
दावानल छोटा हो सम्मुख उनमें ऐसा ताप उठे ।
कहते ' संगम ' सुनो नारियों जब भी विपदा आयेगी,
भीड़ बनेगी गिद्ध तुम्हारा मांस नोचने आयेगी ।
आयेंगे कुछ लोग बाद में घड़ियाली आंसू लेकर,
दिखलाके झूठी मानवता जायेंगे जख्म नया देकर ।
सबल बनो संगठित रहोगी तभी बचेगी अस्मिता,
अब तो आशा नहीं बची कि भीड़ दिखाए नैतिकता ।।
 
3 वर्ष पहले
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