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पर भीतर कितना कौन है जलता

Sandhya tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तरु की पीड़ा तरू से पूछो
        
                                                    
                            
क्या है उसके मन का दर्द
अपनी छाया देकर जग को
खुद सहता है कितने मर्म
झुकी डलियां देती आशीष
फूलों से महकता संसार
तरु का दर्द समझे बस माली
कौन सुन उसकी चित्कार
फूलों की इच्छा किसने पूछी
किसने समझी उनकी वेदना
दुनिया बस चाहे खुशबू
कौन सुने उनकी संवेदना
रुई की बत्ती दिए में
तेल सहारा बनता
जलकर दीप करे उजियारा
दीपक का दर्द न समझे दुनिया
दिवाली मनाए जग सारा
खुद को जलाकर बाटते रोशनी
उनकी पीड़ा कौन समझता
दुनिया तो उत्सव मनायें
पर भीतर कितना कौन है जलता
4 घंटे पहले
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samarth dalela

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