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सबने देखा वीनश संघर्ष तुम्हारा

Sandhya Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सबने देखा है तुम्हारा संघर्ष को
        
                                                    
                            
गांव से लेकर दंगल के मैदानों
तक,
जंतर मंतर के मैदानों से लेकर
पेरिस के अखाड़ों तक।।

तुम्हारे जज्बे की खनक
फोलादो सी,
उनकी चमक बसी थी तेरी
आंखो में।।

यह सबने देखा....
कंकर , पत्थर , खाई कई
बधाओ से लड़कर,
तुम रण में पहुंची थी।।

अपने बल से एक योद्धा कि
तरह पूरे बाहुबल से तुम
लड़ी थी।।

एक पल के लिए मानो वक़्त भी
थम सा गया हो,
उस शिकस्त भी बोनी हो गई
विनश तेरे जज्बे के आगे।।

कुछ ही होते है जो उम्मीदों
को लिए रण में लड़ इतिहास
रच जाते है,
अपने वजूद की पहचान
पाते हैं।।

गोल्ड सिल्वर मैडल ना
सही,
बनकर माटी का दिया जलकर
देश का नाम रौशन तुमने
किया।।

यह दौर तो यूं ही आता जाता
रहेगा,
कई खेलेंगे कई जीतेगे पर
तेरी बहादुरी के चर्चे को सदा ही
याद किए जाएगा।।

कहानी संघर्ष की लिखीं
जाती,
योद्धा की पहचान रण में ही
की जाती।।
-संध्या शर्मा "श्रेष्ठ"
 
2 वर्ष पहले
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