सेवा देकर साठ वर्ष तक
दिया सत्रांत परीक्षा
आंतरिक मूल्यांकन में
थे अंक शून्य
छोड़ संस्था को देखा था
बस खुद की इच्छा
-कुँवर संदीप सिंह