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होकर बेईमान वह सिखाता ईमान

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पसंद नहीं है बिल्कुल भी जो
        
                                                    
                            
देखने से उसको कोई गुरेज नहीं है
कुछ अच्छी बातें दिखें उसमें भी तो
उसे अपना लेने से कोइ परहेज नहीं है

पसंद न होने के कारण हैं कुछ और
नहीं देना चाहता मैं उन बातों पर जोर
पर उनसे उठता है कुछ ऐसा शोर
कि नाव घूम सकती नहीं उस ओर

हिम्मत उसकी भी गजब की वाह-वाह
डुबाकर सबकुछ चले शान से वह राह
दूसरों को रस्ता दिखाए इस तरह
जैसे हर कहीं धूप बस उसमें ही छाँह

होकर बेईमान वह सिखाता ईमान
हर कोइ ही उससे ताज्जुब हैरान
पर उसके होंठों पर रहती मुस्कान
कुदरत तूने रचा कैसे ऐसा इंसान
-कुँवर संदीप सिंह
2 घंटे पहले
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