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इधर भी है उधर भी है

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ बातें आज बताऊँगा, कुछ भावों को भी जताऊँगा
        
                                                    
                            
जिन राहों पर चल रहे हम आप, एक जैसी है दिखलाऊँगा
होने की तमन्ना सफल पथ में, इधर भी है उधर भी है
बाधायें तो आएंगी ही,पर आपको नहीं रुकना है,
परिस्थितियाँ कैसी भी हों, याद रखो नहीं झुकना है
प्रतिदिन चलते रहने का नियम, इधर भी है उधर भी है
ठोकर खाकर गिर भी यदि, तो फिर से तुमको उठना है
चोट भी अगर आ जाए तो, मन से नहीं टूटना है
थकना नहीं थकान में भी, जब तक न मंजिल आ जाए
सफलता को पाने का अरमां, इधर भी है, उधर भी है
तुम्हें आज में जान लगाना है, कल खुशियों की बारिश होगी
तुम्हें अपने पास बुलाने की, फिर कितनों की सिफारिश होगी
कुछ पल के मौज में बह करके, मत आज को बहकने देना
कुछ नया कर दिखाने का जुनून, इधर भी है, उधर भी है।
ज्ञान सुधा का पान करो संदीप्त बनाओ जीवन को
छोटी-छोटी लालच में कुँवर, मत फँसने दो अपने मन को
गंतव्य तक पहुँच जाने से फिर, तुम्हें कोई नहीं रोक पाएगा
उस सपने से मिलने की ख्वाहिश इधर भी है उधर भी है
-कुँवर संदीप सिंह
एक महीने पहले
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