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हिन्दी अनुभूति अभिव्यक्ति की बहार है

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हिन्दी अनुभूति अभिव्यक्ति की बहार है
        
                                                    
                            
हिन्दी बिंदी है होंठलाली है शृंगार है
हिन्दी ममता है प्रेम की बहती धार है
हिन्दी आनंद की अविजित संसार है
हिन्दी जैसी दिखे वैसा ही कहती है
हिन्दी रंग बदल कर नहीं बहती है
हिन्दी व्यक्तित्व संदीप्त कर देती है
हिन्दी सद्भावना उद्दीप्त कर देती है
हिन्दी मस्त कर देती है डूबकर देखो
हिन्दी चूमोगे सबसे ऊबकर देखो
-कुँवर संदीप सिंह
एक महीने पहले
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