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गैरों से फुरसत

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उन्हें नहीं गैरों से फुरसत
        
                                                    
                            
हम नहीं अपनों से खाली
नहीं मिल सकते अपने हाथ
न ही बज पायेगी ताली
एक महीने पहले
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