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विश्वबंधुत्व के इस दौर में अब

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धन व्यर्थ नहीं परदेश का जो
        
                                                    
                            
है बुद्धि विवेक से आन मिला
वह कोठी बॅंगला घर गाड़ी
जिसे आशियाने का मान मिला
जहँ रहते उसी को घर कहते
व्यवहार से अपने सम्मान मिला
धन व्यर्थ नहीं कहते हैं उसे
कर्मफल बनके जो प्रमाण मिला
माँ एक अनेक हैं पुत्र अगर
संग सबके न उसे स्थान मिला
यह बात कुँवर सदा सत्य नहीं
परदेश में बस अपमान मिला
विश्वबंधुत्व के इस दौर में अब
जग को गाँव बनने का मान मिला
-संदीप सिंह कुँवर
एक दिन पहले
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