बड़े बड़े ज्ञानी जिनमें
अनुभव की भरी खुमारी
दिख जाती उनके भीतर भी
कभी कभी लाचारी
नहले पर दहले से जब
हो जाता उनका मेल
कोइ विकल्प नहीं पाते
किसी तरह चलाते खेल
-कुँवर