बदलना हर जगह अच्छा है
मुताबिक दरकार के गर हो
आँगन में भरी रहें खुशियां
अपना या गैरों का घर हो
बदलाव तब मुश्किल होता है
भाव जब बिखर जाते हैं
जिसे दे दिया हमने सबकुछ
वही हमें छोड़कर जाते हैं
बदलाव तब भी मुश्किल है
जब उसे समझ न पाएं
वह कहना चाहे कुछ और ही
हम कुछ और समझ जाएं
-संदीप सिंह कुँवर