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ऐसी रुचियाँ त्याग दो

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐसी रुचियाँ त्याग दो
        
                                                    
                            
जो रच न सकें जीवन को
पल भर को आनंद दें
फिर ग्लानि से भरें मन को
-कुँवर संदीप सिंह
6 घंटे पहले
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