तड़पती रूह को कुछ तो करार आ जाता
सिरहाने मौत से पहले जो यार आ जाता
सकु मिला है यकीनन उनको मेरे मरने से
मलाल झूठा ही सही चेहरे पे यार आ जाता
दिए हैं ज़ख्म जो उसने वो गहरे बहुत हैं,काश मरहम लगाने वो एक बार आ जाता।
बुझ रही है शमा मेरी आखिरी सांसों की,
रोशनी बनकर मेरा वो सायेदार आ जाता।गिला नहीं कि उसने मुझे बरबाद किया,
बस देखने तमाशा ही मेरा वो सितमगार आ जाता।
सजाया है जनाज़ा मेरा सबने मिलकर,
देने कांधा ही सही यार वो आ जाता।