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दिल ऐसे उलझ रहा हैं अनसुलझे सवाल में।

सुनील देव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कितना कुछ बदल गया है इन बीस साल में।।
        
                                                    
                            
चेहरे पे कहीं रौनकें तो कोई खस्ता हाल में।१।

जब आए थे तो दिल में थी हज़ारों ख़्वाहिशें,,
कुछ की पूरी हुई तो कुछ रह गए सवाल में।२।

कोई ढो रहा है ख्वाबों की तस्वीर आजतक,,
किसी ने बना लिया है मकाँ पिछले साल में।३।

इक दौर था वो के किराए का घर ढूँढ रहे थे,,,
आज फँस गया है हर कोई अपने ही जाल में।४।

क्या होगा आगे सोचकर अब ज़िंदगी में यार,,
दिल ऐसे उलझ रहा हैं अनसुलझे सवाल में।५।

कुछ तो अभी वहीं है जहां बिछड़े थे एक रोज़,,
कुछ दूर जाके उदास है फ़िराक़ ओ विसाल में।६।

क्या रंग था चेहरे पे जब हम आए थे नए नए,,
सफ़ेदी झलक आयी है आज दाढ़ी के बाल में।७।

घर पहुँचने की आरज़ू में जो साथ छोड़ गए,,
आ जाए वो भी मिलने शायद अब के साल में।८।

परवाह नहीं है कल की देव बस रफ़्तार ना रुके,,
चलती रहे ये रेल यूँही कोई ना फँसे बवाल में।९।
-सुनील देव,
एक महीने पहले
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