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अपना क्या है इक दिन अपना ऐसा भी अब आना है।।

सुनील देव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपना क्या है इक दिन अपना ऐसा भी अब आना है।।
        
                                                    
                            
चलते चलते पाँव में इक दिन छाला तो पड़ जाना है।।
कौन किसी को दिल से चाहे सिर्फ़ नज़र का धोखा है,,
काग़ज़ की नैया का इक दिन बारिश में गल जाना है।।
शुक्र करो के साथ हैं साँसे क्या जाने कब रुक जाए,,
ये तो हवा का झोंका है बस पल भर में रुक जाना है।।
सुनते आए अपने जैसे यहां बहुत आए और चले गए,,
वक़्त का क्या हैं ये भी हर पल आगे ही बढ़ जाना है।।
बारह मन लकड़ी का ही तो बस खेल जगत में है प्यारे,,
वरना क्या रखा दुनियाँ में के छोड़ सभी कुछ जाना है।।
गोया के इक आस जगी थी वो भी छोड़ गई अब साथ,,
अब जाकर ये समझ में आया सूरज भी ढल जाना है।।
वादा करके इश्क़ में मुझको वो छोड़ गया बस तन्हा देव,,
मुझको भी लगता था मुझको इक दिन तो मिट जाना है।।
-सुनील देव
4 घंटे पहले
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